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- Author,दिलनवाज़ पाशा
- पदनाम,बीबीसी संवाददाता, पलवल से
- 23 फ़रवरी 2026
- पढ़ने का समय: 10 मिनट
सुबह की ठंडी हवा में फ़ज्र की अज़ान की आवाज़ धीरे-धीरे आ रही थी. नल्हड़ मेडिकल कॉलेज अस्पताल के आईसीयू के बाहर बैठी आशूबी की आंखें दरवाजे़ पर टिकी थीं.
कुछ घंटे पहले तक उन्हें यक़ीन था कि उनका 14 साल का बेटा शारिक़ जल्द ठीक हो जाएगा. उनके लिए आख़िर यह सिर्फ़ बुख़ार ही तो था.
लेकिन उस सुबह डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि अब कुछ नहीं किया जा सकता. वह धीमी आवाज़ में कहती हैं, “रात तक तो ठीक था… सुबह देखा तो डॉक्टर पंपिंग कर रहे थे.”
चौदह साल के शारिक़ 25 जनवरी को अचानक बीमार पड़ने से पहले तक बिल्कुल ठीक थे. बुख़ार आने के 48 घंटों के भीतर ही उनकी मौत हो गई. शारिक़ का लिवर फे़ल हुआ था.



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